काम अपने चाँदनी की क्या इमारत आएगी।
अपने हिस्से में तो केवल दर्द की छत आएगी।
आप भी मेरी तरह हैं भारतीय मित्रवर,
धीरे-धीरे आएगी मिटने की आदत आएगी।
पहले मीनारों पे नाचेगी फ़िर उसके बाद में,
तेरे घर भी रौशनी आएगी विधिवत आएगी।
काम अपने चाँदनी की क्या इमारत आएगी।
अपने हिस्से में तो केवल दर्द की छत आएगी।
आप भी मेरी तरह हैं भारतीय मित्रवर,
धीरे-धीरे आएगी मिटने की आदत आएगी।
पहले मीनारों पे नाचेगी फ़िर उसके बाद में,
तेरे घर भी रौशनी आएगी विधिवत आएगी।
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