अबकि अहसान कर गया बादल,
गोद नदिया की भर गया बादल।
बिजलियों से लिपटके रोया बहुत,
आँख धरती क़ी भर गया बादल।
खेल ठहरा मगन हवाओं का,
रेशा-रेशा बिखर गया बादल।
अब हवाएं पता बतायेंगी,
अबकि बारिश किधर गया बादल।
चढ़के अम्बर पे छा गया था जो,
जीना-जीना उतर गया बादल।
Tuesday, August 31, 2010
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