चांद घुलने लगा धीरे-धीरे
शब पिघलने लगी धीरे धीरे
ये तिलिस्मे-मोहब्बत है, क्या है,
जां निकलने लगी धीरे-धीरे।...
पर्वतों को खबर भी हुई ना,
फूटकर ऐसे निकला है झरना।
दिल में अहसास की प्यासी नदिया,
अब मचलने लगी धीरे-धीरे।....
एक मौसम जो ठहरा हुआ था,
मन का गुलशन जो सहरा हुआ था।
अजनबी एक खुशबू को छूकर,
रुत बदलने लगी धीरे-धीरे।....
तड़प है, कसक है ये क्या है,
शफक है, लहक है ये क्या है।
इक शरारा सा जो छू गया क्या,
रूह जलने लगी धीरे-धीरे।....
जी में आता है कुछ ख्वाब बुन लूं,
बिखरी हुई नीदें चुन लूं।
जिंदगी जो बिछड़ सी गई थी,
साथ चलने लगी धीरे-धीरे।.....
शब पिघलने लगी धीरे धीरे
ये तिलिस्मे-मोहब्बत है, क्या है,
जां निकलने लगी धीरे-धीरे।...
पर्वतों को खबर भी हुई ना,
फूटकर ऐसे निकला है झरना।
दिल में अहसास की प्यासी नदिया,
अब मचलने लगी धीरे-धीरे।....
एक मौसम जो ठहरा हुआ था,
मन का गुलशन जो सहरा हुआ था।
अजनबी एक खुशबू को छूकर,
रुत बदलने लगी धीरे-धीरे।....
तड़प है, कसक है ये क्या है,
शफक है, लहक है ये क्या है।
इक शरारा सा जो छू गया क्या,
रूह जलने लगी धीरे-धीरे।....
जी में आता है कुछ ख्वाब बुन लूं,
बिखरी हुई नीदें चुन लूं।
जिंदगी जो बिछड़ सी गई थी,
साथ चलने लगी धीरे-धीरे।.....
2 comments:
तड़प है, कसक है ये क्या है,
शफक है, लहक है ये क्या है।
इक शरारा सा जो छू गया क्या,
रूह जलने लगी धीरे-धीरे।....
बहुत ही सुन्दर गीत...शाहिद भाई बधाई
-अखिलेश सोनी
गीत पसंद आया इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया।
शाहिद समर
Post a Comment