Monday, February 7, 2011

आ गया बसंत

खुशबू बिखर रही है यहां हर तरफ अनंत,
उतरा है रंग जिसका नहीं कहीं कोई अंत।
डाल-डाल खिलखिलाए, मुस्कराए फूल,
तुम भी मुस्कुरा दो सखी आ गया बसंत।

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